IPv6 प्रॉक्सी की बुनियादी बातें: ये IPv4 प्रॉक्सी से कैसे अलग हैं?
IPv6 प्रॉक्सी आपकी रिक्वेस्ट 128 बिट वाली IPv6 व्यवस्था के पते से बाहर भेजती है। IPv4 के पते सीमित हैं और लगातार महँगे हो रहे हैं, जबकि IPv6 के पते बहुत विशाल हैं, इसलिए बड़े ब्लॉक सस्ते में दिए जा सकते हैं। इसका फ़ॉर्मेट लंबा और कोलन से अलग होता है, जैसे 2001:db8::1।
मुख्य फ़र्क पहुँच का है। IPv6 प्रॉक्सी सिर्फ़ उन साइटों से बात कर सकती है जो IPv6 लेती हैं, जबकि डेटा सेंटर और रेज़िडेंशियल प्लान जाने पहचाने IPv4 पर चलते हैं और लगभग हर पेज खोलते हैं। बड़े सर्च इंजन, वीडियो प्लेटफ़ॉर्म और बड़े सोशल नेटवर्क उन सेवाओं की बढ़ती सूची में हैं जो IPv6 पर चलती हैं।
इसलिए यह प्रोडक्ट तब सबसे मज़बूत है जब आपकी मंज़िल तय हो और वह IPv6 सपोर्ट करती हो। IPv4 में बजट वाला चुनाव शेयर्ड डेटा सेंटर है। IPv6 वाली साइटों पर बड़ी मात्रा के लिए IPv6 चुनें।